नई दिल्ली. मूर्तियों पर जनता के पैसे की फिजूलखर्ची के मामले में बसपा प्रमुख मायावती ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया। उन्होंने मूर्ति बनवाने के अपने फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि यह लोगों की इच्छा थी। उन्होंने 2007 से 2011 के बीच लखनऊ और नोएडा में अपनी और उनकी पार्टी के चिह्न हाथी की प्रतिमाएं बनवाई थीं। इसी पर टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मायावती को प्रतिमाओं पर खर्च जनता का पैसा लौटाना होगा।
एक याचिका में आरोप लगाया है कि मायावती ने इन प्रतिमाओं की मदद से खुद की छवि चमकाई। इस पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि प्रतिमाओं से राज्य के विधानमंडल ने एक दलित महिला नेता के प्रति सम्मान दिखाया है। आखिर मैं उनकी इच्छा का अनादर कैसे करुं?
अदालत तय नहीं कर सकती यह पैसा किस पर खर्च किया जाए
इसके साथ ही मायावती ने कहा कि यह पैसा शिक्षा, अस्पताल या किसी और चीज पर खर्च किया जाना था यह एक बहस का मुद्दा है। अदालत यह तय नहीं कर सकती। यह स्मारक लोगों को प्रेरणा दिलाने के लिए बनाए गए थे। इनमें हाथियों की मूर्तियां केवल वास्तुशिल्प की बनावट हैं। ये बसपा के प्रतीक नहीं हैं।
मूर्तियां बनवाने की परियोजना पर 1400 करोड़ खर्च हुए थे
मायावती ने उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहते हुए लखनऊ और नोएडा में दो पार्क बनवाए थे। इन पार्कों में मायावती ने अपनी, संविधान के संस्थापक भीमराव अंबेडकर, बसपा के संस्थापक कांशीराम और पार्टी के चिह्न हाथी की कई प्रतिमाएं बनवाई थीं। इस परियोजना की लागत 1,400 करोड़ रुपए से ज्यादा थी। हाथी की पत्थर की 30 मूर्तियां और कांसे की 22 प्रतिमाएं लगवाई गईं थीं। इस पर 685 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस पर सरकारी खजाने को 111 करोड़ रुपए का नुकसान होने का मामला दर्ज किया था।
इसके मुताबिक एक दिन का भी डिफॉल्ट करने पर कंपनी के कर्ज को एनपीए में डालने की बात थी। इसके तहत बैंक को 180 दिन की डेडलाइन खत्म होने के 15 दिन के भीतर आईबीसी कोड के तहत कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने की अर्जी देनी होती है। इस सर्कुलर से आरबीआई का लोन रिजोल्यूशन मैकेनिज्म भी वापस ले लिया गया था। बैंक पहले कॉरपोरेट डेट रिस्ट्रक्चरिंग और स्ट्रैटजिक डेट रिस्ट्रक्चरिंग के जरिए केस सुलझाते थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बैंक अब आईबीसी के बाहर भी केस निपटा सकेंगे।
किसे मिलेगी राहत?
आरबीआई के सर्कुलर से इंफ्रास्ट्रक्चर, पावर, आयरन, स्टील और टेक्सटाइल सेक्टर को राहत मिलेगी। सबसे ज्यादा एनपीए इन्हीं सेक्टर में हैं। 11 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई के सर्कुलर पर स्थास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। कोर्ट ने सभी पेंडिंग केस अपने पास ट्रांसफर करवा लिए थे। 7 फरवरी 2019 को नए गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा था कि सर्कुलर में बदलाव की कोई योजना नहीं है।
उर्जित पटेल-सरकार के बीच विवाद की वजह था एनपीए से जुड़ा सर्कुलर
आरबीआई का एनपीएस जुड़ा सर्कुलर पिछले गवर्नर उर्जित पटेल और सरकार के बीच विवाद का मुद्दा भी था। उर्जित पटेल ने पिछले साल दिसंबर में इस्तीफा दे दिया था।
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