भारतीय वायुसेना द्वारा पाकिस्तान में आतंकियों के ठिकानों पर बमबारी कर पूरी तरह से तबाह किए जाने से पाकिस्तान बौखला उठा है. इसके बाद एलओसी पर तनाव का माहौल है. आतंकियों के ठिकानों के बर्बाद किए जाने से झल्लाए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने आतंकियों के लिए करो या मरो का फरमान जारी कर दिया है. भारतीय खुफिया एजेंसी से मिली जानकारी के मुताबिक दिल्ली समेत अनेक शहरों के महत्वपूर्ण ठिकाने इन आतंकियों के निशाने पर है. दिल्ली पुलिस ने रेड अलर्ट जारी किया है.
पाकिस्तान में भारत की ओर से की गई एयर स्ट्राइक के बाद जेहाद यूनाइटेड काउंसिल ने भारत में मौजूद आंतकियों को निर्देश जारी किए हैं. पाकिस्तान खुफिया एजेंसी आईएसआई जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों से जुड़े आतंकियों को हमला करने का हुक्म दिया है. अलग-अलग भारतीय शहरों में फिदायीन हमले और बम धमाके करने का प्लान बनाया गया है.
दरअसल, भारतीय वायुसेना ने मंगलवार को पाकिस्तान में एयर स्ट्राइक करके आतंकी ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई की थी. खास बात ये है कि 1971 के बाद पहली बार भारतीय वायुसेना PoK में ही नहीं बल्कि पाकिस्तान की सीमा में दाखिल हुई.
भारतीय सेना के 12 मिराज लड़ाकू विमानों ने मंगलवार सुबह 3 बजे बालाकोट, मुजफ्फराबाद और चकोटी में बमबारी कर आतंकवादियों के ठिकानों को पूरी तरह से तबाह कर दिया. बता दें कि बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद का सबसे बड़ा प्रशिक्षण शिविर चल रहा था. एलओसी से करीब 80 किलोमीटर दूर भारतीय वायुसेना की ओर से किए गए इस एयर स्ट्राइक में बड़ी संख्या में आतंकवादी, ट्रेनर और आतंकियों के कई कमांडर ढेर हो गए.
जम्मू कश्मीर में पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों की ओर से सीजफायर का उल्लंघन किया है और जवाबी कार्रवाई में भारत ने पाकिस्तान के एक F-19 विमान ढेर कर दिया है. भारत ने मंगलवार को अपनी एयर स्ट्राइक में सिर्फ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था लेकिन पाकिस्तान ने नापाक करतूत करते हुए सिविलियन इलाकों में लड़ाकू विमानों से बम गिराए हैं.
पाकिस्तान की इस करतूत को युद्ध की चेतावनी माना जा रहा है. गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इस बैठक में पीएम मोदी को सीमा के हालात के बारे में जानकारी दी है. इसके अलावा गृह मंत्री ने भी सभी खुफिया विभागों को निदेशकों से अहम जानकारी हासिल की है. बडगाम में तकनीकी खराबी के बाद एक चॉपर क्रैश हो गया है जिसमें हमारे दो जवान शहीद हो गए हैं.
भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को देखते वायु सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है. लड़ाकू विमानों को 2 मिनट के भीतर तैयार होने के निर्देश दिए गए हैं. दूसरी ओर पाकिस्तान झूठा प्रोपेगेंडा फैलाते हुए भारतीय विमानों को गिराने का झूठा दावा कर रहा है, जिसका खंडन सरकार की ओर से किया जा चुका है. पाकिस्तान ने यह दावा भी किया है कि उसने दो भारतीय पायलटों को पकड़ लिया है.
Wednesday, February 27, 2019
Wednesday, February 20, 2019
सीरिया से वाक़ई आईएसआईएस का अंत हो चुका है?
सीरिया के उस आख़िरी गांव से लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है जहां ख़ुद को इस्लामिक स्टेट कहने वाले चरमपंथी संगठन का क़ब्ज़ा है.
बुधवार को एक क़ाफ़िले ने इराक़ की सीमा के पास स्थित सीरिया के बाग़ूज़ गांव से सैकड़ों पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को बाहर निकाला.
अमरीका समर्थित सीरियन डेमोक्रेटिक फ़ोर्सेज़ (एसडीएफ़) समूह ने कहा है कि वो इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों के ख़िलाफ़ ऑपरेशन लॉन्च करने से पहले गांव से सभी लोगों को बाहर निकाले जाने का इंतज़ार कर रहा है.
ये भी पढ़ें:कश्मीर में क्या सचमुच लहराया था आईएस का झंडा
एसडीएफ़ ने कहा कि वो इसकी पुष्टि नहीं कर सकता कि गांव से बाहर निकाले गए लोगों में कोई चरमपंथी था या नहीं. एसडीएफ़ के प्रवक्ता मुस्तफ़ा बाली के मुताबिक़ गांव से बाहर ले आए गए लोगों को एक 'स्क्रीनिंग पॉइंट' पर ले जाया जाएगा.
हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स में इस बात को लेकर मतभेद है कि एसडीएफ़ आईएस लड़ाकों के गढ़ का सफ़ाया करने के असल में कितने क़रीब है.
अमरीका समर्थित एसडीएफ़ सीरिया में इस्लामिक स्टेट का मुक़ाबला कर रहा है. इसका कहना है कि आईएस के सबसे ख़तरनाक लड़ाके बाग़ूज़ गांव में ही हैं.
एसडीएफ़ ने कहा है कि वो इस पुष्टि के इंतज़ार में हैं कि बाग़ूज गांव के सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है. समूह का कहना है कि सबको निकाले जाने की पुष्टि हो जाने के बाद ही वो गांव में आईएस के ठिकानों को निशाना बनाना शुरू करेंगे.
समूह के प्रवक्ता मुस्तफ़ा बाली ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, "हमारी सेना के सामने शुरू से सिर्फ़ दो विकल्प रहे हैं-या तो आईएस के लड़ाकों से बिना शर्त के समर्पण करवाना या फिर उनके ख़ात्मे तक युद्ध जारी रखना."
वहीं, एक निगरानी समूह का मानना है कि ऐसा भी हो सकता है कि एसडीएफ़ के साथ हुए समझौते के बाद आईएस के लड़ाके अपने ठिकाने छोड़कर चले गए हों.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार बुधवार को 2,000 लोगों ने गांव ख़ाली कर दिया है. इससे एक दिन पहले उन्हें बाहर निकालने के लिए 50 ट्रक गांव से लगी इराक़ की सीमा पर पहुंचे थे.
संयुक्त राष्ट्र ने गांव में फंसे 200 परिवारों के लिए चिंता ज़ाहिर की थी जिसके बाद गांव ख़ाली कराने के लिए ये गाड़ियां भेजी गई थीं.
संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बैचेलेट ने कहा कि इन परिवारों को आईएस द्वारा गांव ख़ाली करने से रोका जा रहा था और वो अमरीका समर्थित सेना की तरफ़ से लगातार होने वाली बमबारी का शिकार हो रहे थे.
पत्रकारों ने बुधवार को कम से कम 15 गाड़ियों को गांव से निकलते हुए देखा.
हालांकि अभी ये ठीक से नहीं पता है कि बाग़ूज़ गांव में अब कितने लोग फंसे हुए हैं. हालिया हफ़्तों में तक़रीबन 20,000 लोग इस इलाक़े से जान बचाकर भागे हैं. इन लोगों को एसडीएफ़ द्वारा अल-होल के एक कैंप में ले जाया गया है.
जान बचाकर भागे इन 20,000 लोगों में आईएस लड़ाकों की पत्नियां, बच्चे और कई विदेशी नागरिकों समेत ब्रिटेन की शमीमा बेगम भी शामिल हैं. शमीमा 15 साल की उम्र में आईएस में शामिल होने के लिए घर से भाग गई थीं.
शमीमा ने हाल ही में एक बच्चे को जन्म दिया है और अब वो वापस ब्रिटेन लौटना चाहती हैं. हालांकि ब्रिटेन सरकार उनकी ब्रितानी नागरिकता ख़त्म कर दिया है, जिसे शमीमा ने 'अन्यायपूर्ण' बताया है.
पांच साल पहले तक इस्लामिक स्टेट का पश्चिमी सीरिया से लेकर पूर्वी इराक़ के 88,000 वर्ग किलोमीटर इलाक़े पर क़ब्ज़ा था. आज ये आंकड़ा सिमटकर लगभग 300 लड़ाकों और सिर्फ़ 0.5 वर्ग किलोमीटर तक रह गया है.
बाग़ूज़ गांव से लोगों को निकाला जाना और सेना का अंतिम लड़ाई के लिए तैयार होना अपने आप में बेहद महत्वपूर्ण है. लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो इसे इस्लामिक स्टेट समूह का ख़ात्मा मानने की ग़लती नहीं की जानी चाहिए.
जानकारों ने चेतावनी दी है कि इस्लामिक स्टेट की विचारधारा अब भी ज़िंदा है. अगर सीरिया में मौजूद आईएस के सभी लड़ाकों को हरा भी दिया जाता है तो भी इससे जुड़े तमाम समूहों के सदस्य दुनिया भर में फैले हुए हैं.
विशेषज्ञों ने चेताया है कि इस्लामिक स्टेट से प्रेरित लोग और समूह उनके गढ़ के ख़ात्मे के बाद भी दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में हमले जारी रखेंगे.
बुधवार को एक क़ाफ़िले ने इराक़ की सीमा के पास स्थित सीरिया के बाग़ूज़ गांव से सैकड़ों पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को बाहर निकाला.
अमरीका समर्थित सीरियन डेमोक्रेटिक फ़ोर्सेज़ (एसडीएफ़) समूह ने कहा है कि वो इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों के ख़िलाफ़ ऑपरेशन लॉन्च करने से पहले गांव से सभी लोगों को बाहर निकाले जाने का इंतज़ार कर रहा है.
ये भी पढ़ें:कश्मीर में क्या सचमुच लहराया था आईएस का झंडा
एसडीएफ़ ने कहा कि वो इसकी पुष्टि नहीं कर सकता कि गांव से बाहर निकाले गए लोगों में कोई चरमपंथी था या नहीं. एसडीएफ़ के प्रवक्ता मुस्तफ़ा बाली के मुताबिक़ गांव से बाहर ले आए गए लोगों को एक 'स्क्रीनिंग पॉइंट' पर ले जाया जाएगा.
हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स में इस बात को लेकर मतभेद है कि एसडीएफ़ आईएस लड़ाकों के गढ़ का सफ़ाया करने के असल में कितने क़रीब है.
अमरीका समर्थित एसडीएफ़ सीरिया में इस्लामिक स्टेट का मुक़ाबला कर रहा है. इसका कहना है कि आईएस के सबसे ख़तरनाक लड़ाके बाग़ूज़ गांव में ही हैं.
एसडीएफ़ ने कहा है कि वो इस पुष्टि के इंतज़ार में हैं कि बाग़ूज गांव के सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है. समूह का कहना है कि सबको निकाले जाने की पुष्टि हो जाने के बाद ही वो गांव में आईएस के ठिकानों को निशाना बनाना शुरू करेंगे.
समूह के प्रवक्ता मुस्तफ़ा बाली ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, "हमारी सेना के सामने शुरू से सिर्फ़ दो विकल्प रहे हैं-या तो आईएस के लड़ाकों से बिना शर्त के समर्पण करवाना या फिर उनके ख़ात्मे तक युद्ध जारी रखना."
वहीं, एक निगरानी समूह का मानना है कि ऐसा भी हो सकता है कि एसडीएफ़ के साथ हुए समझौते के बाद आईएस के लड़ाके अपने ठिकाने छोड़कर चले गए हों.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार बुधवार को 2,000 लोगों ने गांव ख़ाली कर दिया है. इससे एक दिन पहले उन्हें बाहर निकालने के लिए 50 ट्रक गांव से लगी इराक़ की सीमा पर पहुंचे थे.
संयुक्त राष्ट्र ने गांव में फंसे 200 परिवारों के लिए चिंता ज़ाहिर की थी जिसके बाद गांव ख़ाली कराने के लिए ये गाड़ियां भेजी गई थीं.
संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बैचेलेट ने कहा कि इन परिवारों को आईएस द्वारा गांव ख़ाली करने से रोका जा रहा था और वो अमरीका समर्थित सेना की तरफ़ से लगातार होने वाली बमबारी का शिकार हो रहे थे.
पत्रकारों ने बुधवार को कम से कम 15 गाड़ियों को गांव से निकलते हुए देखा.
हालांकि अभी ये ठीक से नहीं पता है कि बाग़ूज़ गांव में अब कितने लोग फंसे हुए हैं. हालिया हफ़्तों में तक़रीबन 20,000 लोग इस इलाक़े से जान बचाकर भागे हैं. इन लोगों को एसडीएफ़ द्वारा अल-होल के एक कैंप में ले जाया गया है.
जान बचाकर भागे इन 20,000 लोगों में आईएस लड़ाकों की पत्नियां, बच्चे और कई विदेशी नागरिकों समेत ब्रिटेन की शमीमा बेगम भी शामिल हैं. शमीमा 15 साल की उम्र में आईएस में शामिल होने के लिए घर से भाग गई थीं.
शमीमा ने हाल ही में एक बच्चे को जन्म दिया है और अब वो वापस ब्रिटेन लौटना चाहती हैं. हालांकि ब्रिटेन सरकार उनकी ब्रितानी नागरिकता ख़त्म कर दिया है, जिसे शमीमा ने 'अन्यायपूर्ण' बताया है.
पांच साल पहले तक इस्लामिक स्टेट का पश्चिमी सीरिया से लेकर पूर्वी इराक़ के 88,000 वर्ग किलोमीटर इलाक़े पर क़ब्ज़ा था. आज ये आंकड़ा सिमटकर लगभग 300 लड़ाकों और सिर्फ़ 0.5 वर्ग किलोमीटर तक रह गया है.
बाग़ूज़ गांव से लोगों को निकाला जाना और सेना का अंतिम लड़ाई के लिए तैयार होना अपने आप में बेहद महत्वपूर्ण है. लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो इसे इस्लामिक स्टेट समूह का ख़ात्मा मानने की ग़लती नहीं की जानी चाहिए.
जानकारों ने चेतावनी दी है कि इस्लामिक स्टेट की विचारधारा अब भी ज़िंदा है. अगर सीरिया में मौजूद आईएस के सभी लड़ाकों को हरा भी दिया जाता है तो भी इससे जुड़े तमाम समूहों के सदस्य दुनिया भर में फैले हुए हैं.
विशेषज्ञों ने चेताया है कि इस्लामिक स्टेट से प्रेरित लोग और समूह उनके गढ़ के ख़ात्मे के बाद भी दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में हमले जारी रखेंगे.
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